पितृ कर्म की विधि
शास्त्रसम्मत वैदिक परंपराओं के अनुसार प्रत्येक परिवार की विशेष स्थिति के अनुरूप पूर्ण प्रामाणिक अनुष्ठान।
पिंडदान
गया जी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर एवं अक्षयवट की त्रिवेदी पर शास्त्रोक्त विधि से पिंडदान व तर्पण कर्म। इससे पितरों को मोक्ष और परिवार को शांति प्राप्त होती है।
त्रिपिंडी श्राद्ध
यदि किसी कारणवश तीन पीढ़ियों से अधिक समय से वार्षिक श्राद्ध छूट गया हो, या पितृ दोष की शांति अभीष्ट हो, तो सात्विक, राजसिक एवं तामसिक तीनों प्रकार के पितरों की तृप्ति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है।
नारायण बलि
अकाल मृत्यु, दुर्घटना या अप्राकृतिक मृत्यु से दिवंगत आत्माओं की शांति और मोक्ष हेतु नारायण बलि विधान गरुड़ पुराण के अनुसार अत्यंत फलदायी माना गया है।
वार्षिक श्राद्ध
माता-पिता अथवा परिजनों की पुण्यतिथि (तिथि अनुसार) पर गया जी के पवित्र तीर्थ पर किया जाने वाला वार्षिक श्राद्ध। इसमें तर्पण, ब्राह्मण भोजन संकल्प व पिंडदान शामिल है।