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पितृ कर्म की विधि

शास्त्रसम्मत वैदिक परंपराओं के अनुसार प्रत्येक परिवार की विशेष स्थिति के अनुरूप पूर्ण प्रामाणिक अनुष्ठान।

01Gaya Ji Pind Daan

पिंडदान

गया जी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर एवं अक्षयवट की त्रिवेदी पर शास्त्रोक्त विधि से पिंडदान व तर्पण कर्म। इससे पितरों को मोक्ष और परिवार को शांति प्राप्त होती है।

मुख्य विशेषताएं:
शास्त्रोक्त संकल्प व पितृ आह्वान
जौ, तिल, कुशा व दुग्ध से शुद्ध पिंड निर्माण
विष्णु चरण दर्शन व अक्षयवट पर सुफल
अवधि: १ दिन (लगभग ३–४ घंटे) अथवा ३ दिवसीय विधान
स्थान: फल्गु नदी घाट, विष्णुपद मंदिर प्रांगण, अक्षयवट धाम
02Tripindi Shraddha

त्रिपिंडी श्राद्ध

यदि किसी कारणवश तीन पीढ़ियों से अधिक समय से वार्षिक श्राद्ध छूट गया हो, या पितृ दोष की शांति अभीष्ट हो, तो सात्विक, राजसिक एवं तामसिक तीनों प्रकार के पितरों की तृप्ति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है।

मुख्य विशेषताएं:
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवों का आह्वान
सत्व, रज, तम दोषों का निवारण
वंश वृद्धि एवं पारिवारिक सुख-शांति
अवधि: २.५ से ३ घंटे
स्थान: गया जी तीर्थ वेदी
03Narayan Bali

नारायण बलि

अकाल मृत्यु, दुर्घटना या अप्राकृतिक मृत्यु से दिवंगत आत्माओं की शांति और मोक्ष हेतु नारायण बलि विधान गरुड़ पुराण के अनुसार अत्यंत फलदायी माना गया है।

मुख्य विशेषताएं:
भगवान श्री नारायण का विशेष पूजन
अतृप्त आत्माओं की सद्गति व मुक्ति
पितृ ऋण से पूर्ण मुक्ति का संकल्प
अवधि: १ विशेष दिवस (३–४ घंटे)
स्थान: गया जी पवित्र वेदी
04Annual Shraddha

वार्षिक श्राद्ध

माता-पिता अथवा परिजनों की पुण्यतिथि (तिथि अनुसार) पर गया जी के पवित्र तीर्थ पर किया जाने वाला वार्षिक श्राद्ध। इसमें तर्पण, ब्राह्मण भोजन संकल्प व पिंडदान शामिल है।

मुख्य विशेषताएं:
तिथि अनुसार सटीक संकल्प
पारंपरिक तर्पण व हव्य-कव्य अर्पण
पितरों के प्रति कृतज्ञता समर्पण
अवधि: २ घंटे
स्थान: विष्णुपद तीर्थ
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